5+ New Hindi moral Stories for class 9

Hindi moral stories for class 9
Hindi moral stories for class 9 

नमस्कार मित्रों .! आज की इस पोस्ट में  हमने  कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए नैतिक कहानियाँ ( Hindi moral stories for class 9 ) शेयर की हैं| इस पोस्ट में हमने कक्षा 9 के छात्रों के लिए पाँच नैतिक कहानियाँ ( new moral stories in hindi for class 9 ) लिखी हैं, जोकि उम्मीद है आपके लिए Helpful होगी और आपको नैतिक कहानियों का यह संग्रह पसंद आएगा|

Hindi Moral Stories for Class 9

१. अतीत नहीं भुलाना -

एक बार माइक्रोसॉफ्ट कमपनी के संस्थापक बिलगेट्स (विश्व के सबसे अमीर व्यक्ति) एक होटल में दोस्तों के साथ खाना खाने गये | खाना खाने के बाद जब वेटर बिल लेकर आया, तो उन्होंने बिल देने के साथ उसको अच्छी सर्विस के लिए १० डॉलर टिप भी दी

जब वह उठकर जाने लगे तो वेटर उनकी तरफ ही देख रहा था| बिलगेट्स के पूछने पर उसने बताया कि कुछ दिनों पहले उसकी बेटी उसी होटल में आई थी, तो उसने टिप में १०० डॉलर दिए थे जबकि आप विश्व के सबसे अमीर व्यक्ति होते हुए भी मात्र १० डॉलर टिप दी|

इस पर बिलगेट्स ने मुस्कुराते हुए कहा की वह दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति की बेटी है जबकि में एक सामान्य परिवार का बेटा हूँ|

मुझे मेरे अतीत हमेशा याद रहता है क्योंकि मेरा अतीत मेरा मार्गदर्शक है|

२. क्रोध, आपका शत्रु -

एक बार एक आदमी अपनी नयी कार पर पोलिश कर उसे चमका रहा था| तभी उसका ६ साल का बच्चा पत्थर से कार पर कुछ लिखने लगा| 

यह देखकर उस आदमी को बहुत गुस्सा आया और उसने गुस्से में बच्चे का हाथ मरोड़ा जिससे उसकी उंगली टूट गयी| 

इस पर वह आदमी तुरंत उसे अस्पताल ले गया, उसे अपने किये पर बहुत पछतावा हो रहा था| 

पट्टी होने के बाद बच्चे ने पापा से पूछा कि वह कब तक सही होग| यह सुनकर वह कुछ बोल नहीं पाए और उन्हें अपने किये पर बहुत दुःख हो रहा था और उसे वो घर ले गए| 

जब वो गाडी के पास गए तो उन्होंने देखा की उस बच्चे ने गाडी पर “आई लव माय डैड” लिखा था| यह देखकर बच्चे के पिता की आँखों में आसू आ गये और वहुत पश्चाताप हो रहा था|

गुस्से में लिए गये अचानक फैसले या किये गये काम पर पछतावा के अलावा कुछ नही होता| ( very short moral stories in hindi for class 9

पढ़ें :- बच्चों के लिए 7+ लघु नैतिक कहानियाँ 

३. अपना अपना नजरिया -


एक बार एक संत अपने शिष्यों के साथ नदी में स्नान कर रहे थे| 

उसी समय वहां से गुजर रहे एक राही ने उनसे पुछा, “महत्मा जी, यहाँ के लोग कैसे है क्योंकि मै यहाँ पर नया आया हु इसीलिए मुझे यहाँ के बारे में विशेष जानकारी नहीं है |”


इस पर महात्मा ने उत्तर दिया कि पहले आप मुझे यह बताये कि आप जिस जगह से आये हो, वहां के स्थानीय लोग कैसे हैं?


इस पर राहगीर बोला, “वहां के लोग बहुत कपटी व दुष्ट हैं, उनके लिए तो कुछ कहना ही क्या, इसीलिए मै वहा छोड़कर यहाँ निवास करने आया हूँ|


इस पर संत ने जबाब दिया की यहाँ के लोग भी कपटी व् दुष्ट हैं|

कुछ समय पश्चात एक और राहगीर वहा से गुजरा और प्रणाम करते हुए वाही प्रश्न पूछा|

संत ने फिर वही उत्त्तर दिया कि पहले आप ये बताये की आप जहाँ से आये हैं, वहां के लोग कैसे थे ?

इस पर राहगीर बोला, “गुरुवर, मै जहाँ से आया हु वहां के लोग बहुत ही अच्छे स्वभाव व सभ्य थे|

इस पर महात्मा बोले कि तुम्हे यहाँ भी भले व सभ्य इंसान मिलेंगे|

राहगीर प्रणाम करके वहां से चला गया|

शिष्य यह सब देख रहे थे और प्रश्न किया कि आपने दोनों राहगीरों को अलग अलग उत्तर क्यों दिया? 

इस पर महात्मा मुस्कुराते हुए बोले कि इस संसार में जैसा दिखता है वैसा होता नहीं है| हम जिस नजरिये से चीजों को देखते है, हमें वैसी ही चीजें दिखती है| अगर हम अच्छाई देखेंगे तो हमें हर जगह अच्छे व्यक्ति मिल ही जायेंगे|


४. सफलता का रहस्य - 

एक बार माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी के संस्थापक बिलगेट्स ( दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति ) को अमेरिका के एक कॉलेज में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया| उनके प्रवेश करते ही सभी विद्यार्थियों ने तालियों से उनका स्वागत किया| 

कुछ समय बाद जब प्रश्नोत्तर का समय आरम्भ हुआ तो एक छात्र ने उनसे प्रश्न किया की कई बार हम बहुत परिश्रम करते है फिर भी हमें सफलता नहीं मिलती क्योंकि हमारा भाग्य आपके जैसा नहीं है| दुसरे छात्र ने भी इस बात का समर्थन किया |

बिलगेट्स इन प्रश्नों को शांतिपूर्वक सुनते रहे फिर उन्होंने कहा की मै आज आपसे अपने जीवन के पांच रहस्य शेयर करना चाहता हूँ जिन्होंने मुझे इन ऊंचाईयों को छूने में मेरी सहायता की|

अब, हाल में बिलकुल शान्ति थी|

बिलगेट्स ने बताया,

पहला– मै हमेशा कुछ सीखने का जिज्ञासु हूँ | मै निरंतर कुछ नया सीखने की कोशिश करता हूँ|

दूसरा- मै किताबी कीड़ा था और मुझे किताबे पढने का इतना शौक़ीन था की मेरे माता-पिता ने मुझे खाना खाते समय किताबे पढने पर रोक लगा दी थी|

तीसरा- मै अपनी सफलता पर कभी घमंड नही करता और इसका श्रेय दूसरों को देता हु|  

चौथा- मै अपने निर्णय पर पूर्ण विश्वास रखता था और अगर मेरा कोई निर्णय गलत होता तो में उसको सही साबित करने की पूरी कोशिश करता हूँ|

पांचवां – पांचवां रहस्य है, जो आप इस समय कर रहे हैं की मेरी बात ध्यानपूर्वक होकर रहे हैं|

हम किसी की सफलता उसके भाग्य से जोड़ देते है जबकि इसके पीछे उसके कठिन परिश्रम व त्याग को नहीं देखते |  ( long moral stories in hindi for class 9 )


५. धैर्य -


एक बार जापान के एक शहर के पास छोटे से गाँव में एक विद्वान संत रहते थे| एक दिन वह अपने एक शिष्य के साथ सुबह भ्रमण कर रहे थे| 

तभी एक व्यक्ति उनके पास आकर उन्हें बुरा भला कहने लगा और संत के लिए अपशब्दों का प्रयोग करने लगा| 
परन्तु संत ने उससे कुछ भी नहीं कहा और मुस्कुराते हुए आगे बढ़ दिए| इस पर वह व्यक्ति और क्रोधित हो गया और संत के पूर्वजों के लिए भी अप्सब्द कहने लगा| लेकिन संत फिर भी मुस्कुराते रहे| 

फिर वह व्यक्ति निराश होकर वहां से चला गया| 

उसके जाने के बाद शिष्य ने उनसे पूछा की आपने उस व्यक्ति से कुछ कहा क्यों नही| 

इस पर संत ने उन्हें अपने साथ चलने को कहा और एक कक्ष में गये| संत ने शिष्य से कहा तुम यहीं रुको मै अभी आता हूँ| 

कुछ समय बाद संत अन्दर से एक बहुत मैला और गन्दा कपडा लेकर आये जिसमे से बहुत दुर्गन्ध आ रही थी| 

संत ने शिष्य को अपने कपडे उतारकर वह कपडे पहने के लिए कहा इस पर शिष्य ने उसको हाथ में लेकर दूर फेंक दिया|


संत बोले की अब तुम्हे समझ आया की जब तुमसे बिना मतलब कोई बुरा – भला कहता है तो तुम क्रोध में उसके द्वारा फेंके हुए अपशब्द धारण कर लेते हो अपने साफ़ सुथरे कपड़ों के जगह | इसीलिए जब तुम आपने साफ सुथरे कपड़ों की जगह ये मैले वस्त्र धारण नही कर सकते उसी तरह मई उस व्यक्ति के अप्सब्दों को कैसे धारण कर लेता | यही वजह थी कि मुझे उसकी बातों का कोई फरक नही पड़ा| 


Final Words - 

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5+ New Hindi moral Stories for class 9 5+ New Hindi moral Stories for class 9 Reviewed by Rajat Agnihotri on November 01, 2019 Rating: 5

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