Tenali Raman Stories in Hindi | तेनाली राम की कहानियां, Stories of tenali raman

About Tenali raman in hindi -     

तेनालीराम आन्ध्र प्रदेश के तेलगु कवि थे, जो विदूषक के रूप में जाने जाते थे| ये विजयनगर के राजा कृष्णदेव के दरबार के अष्टदिग्गजों में से एक थे| वे अपनी कुशाग्र बुद्धि व हास्य बोध के लिए प्रसिद्ध थे|
 
आज की इस पोस्ट में हमने तेनाली राम की कुछ कहानियां ( Tenali raman stories in hindi ) शेयर की हैं, आप एक शिक्षक या पेरेंट्स हैं तो ये कहानियां( stories of tenaliraman in hindi ) अपने बच्चों को सुना सकते हैं .. 
 

तो बिना आपका समय बर्बाद किये ..
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Let's dive in the post -


                          Tenali raman stories in Hindi 

Tenali raman stories in hindi
Tenali raman 

Stories of tenali raman in hindi #1 - लाल मोर 


विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय को अनोखी चीजें जमा करने का बहुत शौक था | हर दरबारी उन्हें खुश करने के लिए ऐसी ही चीजों की खोज में लगे रहते थे, ताकि उन्हें खुश करके मोती रकम वसूल सके|

एक बार एक दरबारी ने दरबार में एक मोर को लाल रंग में रंग कर पेश किया और कहा, “महराज, इस लाल रंग के मोर को मैंने बहुत मुश्किल से मध्य प्रदेश के घने जंगलों से आपके के लिए पकड़ा है|” राजा ने बहुत गौर से उस मोर को देखा, उन्होंने लाल मोर को कभी नहीं देखा था|

राजा ने बहुत खुश होकर कहा की वास्तव में वह बहुत अद्भुत चीज लाया है और पूछा की इस मोर को लाने में कितना खर्चा पड़ा | दरबारी अपनी प्रशंसा सुनकर आगे की चाल के बारे में सोचने लगा |

उसने बताया की उसे वह मोर खोजने में करीब पच्चीस हजार रूपए खर्च करने पड़े|

राजा ने तीस हजार रूपए के साथ पांच हजार पुरुष्कार राशि की भी घोषणा की| यह बात सुनकर दरबारी तेनाली राम की तरफ देखकर मुस्कुराने लगा|

तेनाली राम समझ गये की यह जरूर उस दरबारी की चाल है| वह जानते थे कि लाल रंग का मोर कहीं नहीं होता| बस फिर क्या, तेनाली उस रंग विशेष की तलाश में जुट गये|

दुसरे ही  दिन उस चित्रकार को खोज निकाला, वे उसके पास चार मोर लेकर गये और उन्हें रंगवा कर राजा के सामने पेश किया|

“महाराज हमारे दरबारी मित्र, पच्चीस हजार में सिर्फ एक मोर लेकर आये थे, पर मै उतने में चार ले आया हूँ|”

वास्तव में, मोर बहुत खूबसूरत थे| राजा ने तेनाली को पच्चीस हजार रूपए देने की घोषणा की| तेनाली ने यह सुनकर एक व्यक्ति की तरफ इशारा करते हुए कहा कि, “महराज, अगर कुछ देना ही है तो इस चित्रकार को दें, इसी ने इन नीले मोरों को इतनी ख़ूबसूरती से रंगा है |”

राजा को समझते देर नहीं लगी कि पहले दिन दरबारी ने उन्हें मूर्ख बनाया था|

राजा ने उस दरबारी को पच्चीस हजार रूपए लौटने के साथ पंच हजार रूपए जुर्माने का आदेश दिया| चित्रकार को उचित पुरुष्कार दिया गया और दरबारी बेचारा सा मुंह लेकर रह गया|

Tenali raman stories in hindi #2- तेनाली की कला 


विजयनगर के राजा अपने महल में चित्रकारी करवाना चाहते थे| इस काम के लिए उन्होंने ने एक चित्रकार को नियुक्त किया| चित्रों को जिसने भी देखा, बहुत सराहना की परन्तु तेनाली राम को कुछ संदेह था|                                                                                                                                 
एक चित्र की प्रष्ठभूमि में प्राकृतिक द्रश्य था, उसके सामने खड़े होकर तेनालीराम ने बोलेपन से पूछा, “इसका दूसरा पक्ष कहाँ है?” राजा ने हँस कर जवाब दिया कि तुम्हे इतना भी नहीं पता की उनकी कल्पना करनी होती है| तेनाली राम ने दबी आवाज में कहा, “ तो ऐसे बनते हैं चित्र! ठीक है, मै समझ गया |”

कुछ महीनो बाद तेनाली राम ने राजा से कहा कि वह कई महीनो से दिन-रात चित्रकला सीख रहा है अगर उनकी आज्ञा हो तो वह राजमहल की दीवारों पर कुछ चित्र बनाना चाहता है |

राजा ने कहा, “वाह! यह तो बहुत अच्छी बात है| ऐसा करो, जिन भित्तिचित्रो के रंग उड़ गये है उनको मिटाकर नए चित्र बना दो|

तेनालीराम ने पुराने चित्रों पर सफेदी पोतकर उनकी जगह अपने चित्र बनाने शुरू कर दिया | उसने एक पांव वहा बनाया, एक आँख वहां बनाई और एक अंगुली कही और | इस तरह शारीर के अलग अलग अंगों के चित्र बनाकर दीवारों हो भर दिया| 

चित्रकारी के बाद तेनाली ने राजा को कला देखने के लिए आमंत्रित किया | महल की दीवारों पर असम्बद्ध अगों के चित्र देख राजा को बहुत निराशा हुई| राजा ने पूछा कि यह उसने क्या किया, तस्वीरें कहा हैं?

तेनाली राम ने जवाब दिया कि चित्रों में बाकी चीज़ों की तो कल्पना करनी पड़ती है| आपने अभी मेरा सबसे अच्छा चित्र तो देखा ही नही | यह कहकर वह राजा को एक खली दीवार के पास ले गया जिस पर कुछ एक हरी – पीली लकीरें बनी थी|

राजा ने चिढ़कर पूछा कि यह क्या है ?

“यह घास खाती गाय का चित्र है|” “लेकिन गाय कहाँ है?”, राजा ने पूछा| तेनाली राम बोला कि यह मान लीजिये कि गाय घास खाकर बाड़े में चली गयी, हो गया ना चित्र पूरा | यह सुनकर राजा समझ गया कि तेनालीराम ने उस दिन की बात का जवाब दिया है |

Tenali raman stories in hindi #3 - जनता की अदालत 


एक दिन राजा कृष्णदेव राय जंगल में शिकार के लिए गए | वह जंगल में रास्ता भटक गये, दरबारी पीछे छूट गये |उन्होंने अपने घोड़े को एक पेड़ से बाँध दिया | शाम होने वाली थी | रात पास के गाँव में बिताने का निश्चय किया | 

राहगीर के वेश में एक किसान के पास गये और कहा, “दूर से आया हूँ, रात को आश्रय मिल सकता है?”
किसान ने उत्तर दिया, “ आओ, जो रूखा- सूखा हम खाते हैं, आप भी खाइएगा | मेरे पास एक पुराना कम्बल ही है, क्या उसमे जाड़े क रात काट सकेंगे?”  

राजा ने ‘हाँ’ कहते हुए सर हिलाया |


रात को राजा गाँव में घूमे | भयानक गरीबी थी| उन्होंने पुछा की दरबार में जाकर फरियाद क्यों नहीं करते? किसान बोला कि राजा तो चापलूसों से घिरे रहते हैं, कैसे जाएँ?


सुबह राजधानी लौटते ही राजा ने मंत्री और दुसरे अधिकारीयों को बुलाया और कहा, “ हमें पता चला है, हमारे राज्य के गाँव की हालत ठीक नहीं है | तुम गावों की भलाई के काम करने के लिए खजाने से काफी रुपया ले चुके हो, उसका क्या हुआ?”


मंत्री ने बताया की सारा पैसा गावों की भलाई में खर्च हुआ है आपको किसीने गलत बताया है | मंत्री के जाने के बाद राजा ने तेनाली राम को बुलाया और कल की पूरी घटना सुनाई | तेनाली राम ने कहा, “ महराज, प्रजा दरबार में नहीं आएगी | अब आपको ही उनके दरबार में जाना चाहिए| उनके साथ जो अन्याय हुआ है उसका फैसला उन्ही के बीच जाकर कीजिये |”


अगले दिन राजा ने यह घोषणा की कल से वह गाँव – गाँव जायेंगे, यह देखने की उनकी प्रजा किस हाल में जी रही है | मंत्री बोला, “महराज, लोग खुशहाल हैं| आप चिंता न करें | जाड़े में बेकार परेशान होंगे |”
तेनाली राम बोला, “मंत्रीजी से ज्यादा प्रजा का भला चाहने वाला और कौन होगा? यह जो कर रहें हैं, ठीक ही होगा | मगर आप भी तो प्रजा की खुशहाली देखिये |” 

मंत्री ने राजा को आस पास के गाँव दिखाने चाहे पर राजा ने दूर-दराज के गावों की तरफ घोड़ा मोड़ दिया | राजा को सामने पाकर लोग खुलकर अपनी समस्याएं बताने लगे |

मंत्री के कारनामे का सारा भेद खुल चूका था, वह सर झुकाए खड़ा था | राजा कृष्णदेव राय ने घोषणा करवा दी की अब हर महीने कम से कम एक बार वे खुद जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे |

Tenali raman short stories in hindi #4 - कितने कौवे 


महाराज कृष्णदेव राय तेनाली राम का मखौल उड़ाने के लिए उलटे – पुल्टे सवाल करते थे | तेनाली राम हर बार ऐसा जबाब देते थे की राजा की बोलती बंद हो जाती थी| 

एक दिन राजा ने तेनाली से पूछा, “तेनालीराम! क्या तुम बता सकते हो की हमारी राजधानी में कितने कौवे हैं?” हाँ बता सकता हूँ महराज!, तेनाली राम तपाक से बोले| महाराज बोले बिलकुल सही गिनती बताना |
जी हाँ महराज, बिलकुल सही बताऊंगा| तेनालीराम ने जवाब दिया | दरबारियों ने अंदाजा लगा लिया की आज तेनाली राम जरूर फंसेंगे| भला परिंदों की गिनती कैसे संभव है? “तुम्हे दो दिन का समय देते हैं | तीसरे दिन तुम्हे बताना है कि हमारी राजधानी में कितने कौवे हैं|” महाराज ने आदेश की भाषा में कहा |
तीसरे दिन फिर दरबार जुड़ा| तेनालीराम अपने स्थान से उठकर बोला, “ महराज, हमारी राजधानी में कुल एक लाख पचास हजार नौ सौ निन्यानवे कौवे हैं| महराज कोई शक हो तो गिनती करा लो|
राजा ने कहा गिनती होने पर संख्या कम ज्यादा निकली तो ? महाराज, ऐसा नहीं होगा| बड़े विश्वास से तेनाली ने कहा| अगर गिनती गलत निकली  तो इसका भी कारण होगा | राजा ने संभव कारण पूछा |
तेनालीराम ने जवाब दिया, “ यदि राजधानी में कौओ की संख्या बढती है तो इसका है कि हमारी राजधानी में कौओ के कुछ रिश्तेदार और इष्ट मित्र उनसे मिलने आये हुए हैं| संख्या घाट गयी है तो इसका मतलब है हमारे कुछ कौए राजधानी से बाहर अपने रिश्तेदारों से मिलने गये है| वरना कौओं की संख्या एक लाख पचास हजार नौ सौ निन्यानवे ही होगी | 

तेनाली राम से जलने वाले भीतर ही भीतर जल गये |

Stories of Tenali raman #5 - उधार का बोझ  


एक बार किसी वित्तीय समस्या में फँसकर तेनाली राम ने राजा कृष्णदेव राय से कुछ रूपए उषार लिए थे | समय बीतता गया और पैसे वापस करने का समय भी निकट आ गया परन्तु तेनाली के पास पैसे लौटने का कोई प्रबंध नहीं हो पाया था | तो उसने उधार चुकाने से बचने के लिए एक योजना बनाई |

एक दिन राजा को तेनाली राम की पत्नी की ओर से एक पत्र मिला | उस पत्र में लिखा था की तेनाली राम बहुत बीमार है | तेनाली राम कई दिनों से महल में नहीं आ रहा था, इसीलिए राजा ने सोचा की स्वयं जाकर तेनाली से मिला जाय | साथ ही राजा को यह भी शक हुआ की कही उधार से बचने  के लिए तेनाली राम की कोई योजना तो नहीं है |

राजा तेनाली राम के घर पहुंचे | वहां तेनाली राम कम्बल ओढ़कर पलंग पर लेटा हुआ था | उसको ऐसी हालत में देखकर राजा ने उसकी पत्नी से कारण पूछा | वह बोली, “ महाराज, इनके दिल पर आपके दिए हुए उधार का बोझ है यही चिंता इन्हे मन ही मन खाए जा रही है और शायद इसी कारण ये बीमार हो गये |

राजा ने ने तेनाली को सांत्वना दी और परेशान न होंने के लिए कहा | राजा ने कहा कि वह उनके उधार में बंधा नही है अतः चिंता छोड़कर शीघ्र स्वस्थ हो जाओ |

यह सुनकर तेनाली राम पलंग से कूद पड़ा और हँसते हुए बोला, “महराज, धन्यबाद |’  “ यह क्या है, तेनाली?तुम बीमार नहीं थे, मुझसे झूठ बोलने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?” राजा ने गुस्से में कहा |

“नहीं नहीं , महराज , मैंने आपसे झूठ नहीं बोला | मैं उधार के बोझ से बीमार था | आपने जैसे ही मुझे उषार से मुक्त किया, तभी से मेरी सारी चिंता ख़तम हो गयी और मेरे ऊपर से उधार का बोझ हट गया| इस बोझ के हटते ही मेरी बीमारी भी जाती रही और मैं अपने को स्वस्थ महसूस करने लगा | अब आपके आदेशानुसार मैं स्वतंत्र, स्वस्थ व् प्रसन्न हूँ|”

हमेशा की तरह राजा के पास कहने के लिए कुछ न था, वह तेनाली की योजना पर मुस्करा पड़े |

Conclusion -

I hope that you will like our post "Tenali raman Stories in Hindi" and don't forget to comment which story you liked most. 



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Tenali Raman Stories in Hindi | तेनाली राम की कहानियां, Stories of tenali raman Tenali Raman Stories in Hindi | तेनाली राम की कहानियां,  Stories of tenali raman Reviewed by Rajat Agnihotri on July 27, 2019 Rating: 5

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